Castor Seed Price Today

आज की पोस्ट में आपका स्वागत है. आज की पोस्ट में हम अरंडी के बारे में विस्तार से माहिती प्रदान करने वाले है.तो चलिए शरुआत करते है. अरंडी यानी कैस्टर (castor oil price) की खेती जायदातर वानस्पतिक तेल के उत्पादन के लिए की जाती है. अरंडी का तेल (castor oil market price) की डिमांड पूरी दुनिया में रहती है। आपको जानके ख़ुशी होंगी की पूरी दुनिया में भारत सबसे बड़ा अरंडी उत्पादक देश है.

Castor seed Price Today राज्य के हिसाब से भारत में सबसे जायदा अरंडी का उत्पादन करने वाला राज्य गुजरात है. गुजरात में हर साल लाखो टन अंरडी की जाती है। गुजरात राज्य के अलावा राजस्थान, आंध्र प्रदेश जैसे कई राज्यों में अरंडी की खेती होती है. राजस्थान के बाड़मेर, हनुमानगढ़,जोधपुर, जालौर, भरतपुर, सिरोही जिलों में अरंडी की खेती होती है.

पुरी दुनिया में भारत देश सबसे बड़ा कैस्टर का उत्पादन करने वाला देश है. विश्व की लगभग 90 फीसदी जरूरतों को सिर्फ भारत पूरा करता है. भारत के अरंडी तेल के निर्यात का लगभग 40 फीसदी सिर्फ चीन को होता है उसके बाद यूरोप का नंबर आता है.

Castor Seed

अरंडी वानस्पतिक तेल जो उत्पादन करने वाली खरीफ की एक प्रमुख फसल है| अरंडी के तेल का उपयोग साबुन, रंग, वार्निश, कपड़ा रंगाई उद्योग, हाइड्रोलिक ब्रेक तेल, प्लास्टिक, चमड़ा उद्योग में होता है. अरंडी की पत्तियां रेशम के कीटों को पालने व हरी खाद बनाने में अहम् हिस्सा रखती है. Castor seed Price Today जायदातर खली खाद के रूप में काम आती है. अरंडी की खेती सिंचित और असिंचित दोनो ही स्थितियों में की जाती है.

Castor Seed अरंडी की खेती अलग अलग प्रकार के जलवायु में की जा सकती है. इसकी बुवाई खासतौर पर खरीफ और रबी मौसम में होती है. इसलिए फसल पर पाले का प्रभाव भी पड़ता है. यह खेती सूखा सहन कर सकती है लेकिन हम आपको बता दे की जल भराव के प्रति संवेदनशील है. अरण्डी फसल को 20 से 27 डिग्री सेन्टिग्रेड तापमान और कम आद्रता की आवश्यकता होती है. पौधे की वृद्धि तथा बीज पकने के समय उच्च ताप और फूल आने पर अपेक्षाकृत कम तापमान की आवश्यकता पड़ती है.

Caster Seed

संकुल किस्में- ज्योति, अरूणा, क्रान्ति, काल्पी- 6, टी- 3, पंजाब अरंडी नं- 1 आदि|

संकर किस्में- जी सी एच- 4, जी सी एच- 5, डी सी एच- 32, जी एयू सी एच- 1, जी सी एच- 6, डी सी एच- 177, डी सी एच- 519 आदि| अरंडी की राज्यवार किस्मों की पूरी जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें- अरंडी की उन्नत किस्में, जानिए क्षेत्रवार, विशेषताएं और पैदावार।

अरंडी का पौधा मजबूत होता है इसलिए गहरी जुताई फसल के लिए बहुत लाभदायक है. एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें तथा दो- तीन जुताई कल्टीवेटर या हैरो से आवश्यकतानुसार करें और पाटा लगाकर खेत को समतल करें| वर्षा होने पर खेत में उपयुक्त नमी की अवस्था में जुताई करें ताकि खेत की मिट्टी भुरभुरी हो जाए और खरपतवार आदि नष्ट हो जाएं।

Castor Seed की बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी बहुत जरुरी है. अरंडी खरीफ में उगायी जाने वाली फसल है. और जहाँ समय समय पर वर्षा होती रहती है. अरण्डी की जड़ें, अधिक गहराई से भी नमी का शोषण कर लेती हैं. वर्षा काल में बुवाई के 45 से 60 दिनों तक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है. अगर पहले पानी दे देते हैं तो जड़े ऊपर रह जाती हैं व गहराई में नहीं जा पाती है. इसलिए पहला पानी आवश्यक हो तभी दें, ताकि जड़ों का अच्छा विकास हो सके, इसके बाद आवश्यकतानुसार 18 से 20 दिनों के अन्तराल पर सिंचाई करते रहें।

जब Castor Seed Price Today के सिकरे पीले या भूरे हो जाएं तब कटाई करें। सिकरों के पूरा पकने तक का आप इन्तजार नहीं करें, और उत्पाद के चटकने से पैदावार में हानि होगी। अरण्डी में पहली तुडाई ज्यादतर 90 से 110 दिन बाद और बाद में हर माह आवश्यकतानुसार तुड़ाई करते हैं. सिंचित अवस्था में 30 से 35 क्विंटल प्रति हैक्टेयर पैदावार प्राप्त की जा सकती है.

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